3 worlds Hindi

3 लोक का परिचय – निराकार, आकार, साकार

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कितनी दुनीयाए है? दुनिया के कितने आयाम है? आत्मा के बारे में कहा भी जाता हैं कि – परमधाम का निवासी आया देश पराये…

आत्मा के वास्तविक घर के बारे में जानने से पहले तीन लोकों के बारे में जानना ज़रूरी हैं यह तीन लोक इस प्रकार हैं:

स्थूल लोक, सूक्ष्म लोक तथा ब्रह्मा लोक।

1. स्थूल लोक

इसे मनुष्य-लोक, सकार-लोक, पृथ्वी-लोक व कर्मक्षेत्र भी कहा गया हैं। इसी संसार रूपी रंगमंच पर हम सभी आत्माएं इस भौतिक शरीर को धारण कर कर्म करती हैं व दुःख-सुख का खेल करती हैं और इन्हीं के आधार पर फ़ल भोगती हैं। यहाँ मनुष्य-सृष्टि रूपी नाटक चलता रहता हैं और इस नाटक की अवधि 5000 वर्ष हैं। आत्मा अपने अभिनय और कर्मों के फ़लस्वरूप बार-बार शरीर बदलती हैं। एक आत्मा अधिकतम 84 जन्म ले सकती हैं और न्यूनतम 1 जन्म। सब कर्मों के आधार पर ही होता हैं। इसी कर्मक्षेत्र पर ही आत्मा अच्छे कर्म कर अपने भविष्य और आने वाले जन्म की नींव रखती हैं, फिर नाटक पूरा होने पर वापिस अपने वास्तविक घर चली जाती हैं।

2. सूक्ष्म लोक

इस साकारी मनुष्य लोक के ऊपर सूर्य-चाँद, तारागण व आकाश तत्व के पार एक और लोक हैं जहाँ ब्रह्मा-विष्णु-शंकर अपनी-अपनी सूक्ष्म पुरियों में रहते हैं। वहां पर इनकी काया पांच तत्वों की न बनी होकर, बल्कि प्रकाशमयी होती हैं इन्हें इन स्थूल आँखों से नहीं देखा जा सकता। इन्हें दिव्या नेत्रों द्वारा ही देखा जा सकता हैं। इस लोक में जन्म-मरण या दुःख-सुख नहीं होता हैं और न ही ध्वनि होती हैं। यहाँ बोलते हैं पर आवाज़ नहीं होती। इसे वाइसलेस वर्ल्ड (Voiceless World) भी कहते हैं।

3 worlds - Brahma Kumaris trilok

निराकार आत्मा की दुनिया, आकार फरिस्तो की दुनिया और साकार दुनिया (सृस्टि)

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3. ब्रह्मलोक

सूक्ष्म लोक से भी ऊपर जो आखिरी लोक हैं उसे परलोक, ब्रह्मलोक अथवा परमधाम भी कहते हैं, यहाँ न स्थूल शरीर होता हैं न सूक्ष्म और न ही ध्वनि या कर्म या वचन या दुःख-सुख। यहाँ चारो ओर शांति ही शांति होती हैं इसलिए इसे शान्तिधाम, मुक्तिधाम ओर निर्वाणधाम भी कहते हैं। यहाँ एक ज्योंति तत्व व्यापक हैं जिसे ‘ब्रह्म’ कहते हैं यह ब्रह्म-तत्व चेतन नहीं हैं बल्कि सत-रज-तम से न्यारा छटा तत्व हैं। इस अखंड ज्योंति ब्रह्म-तत्व में सभी आत्माएं अशरीरी रूप में, अपने वास्तविक प्रकाश स्वरूप में संकल्प-विकल्प रहित, दुःख-सुख से न्यारी, निर्लेप अवस्था में अपने पिता – परमात्मा (परम+आत्मा) के साथ रहती हैं इसी अवस्था को मुक्ति कहा जाता हैं। यही आत्मा का वास्तविक घर हैं और आत्मा यही से सृष्टि रूपी रंगमंच पर आकर अपने पार्ट के अनुरूप माता के गर्भ में शरीर रूपी वेशभूषा धारण करके जन्म लेती हैं।

जन्म-जन्मांतर शरीर के संबंधों को निभाते-निभाते आत्मा की आसक्ति देह में हो गई और आत्मा अपने ज्योंति स्वरूप को भूल कर स्वयं को यह पांच तत्वों से बना शरीरी (देह) समझने लगी। और इसी के परिणामस्वरूप आत्मा का आचार-व्यवहार तथा खान-पान विकारो के वशीभूत हो गया, जो कर्मइन्द्रियां आत्मा की सहायक, अंग अथवा गुलाम होती थी आज वह मालिक बन गई हैं और आत्मा को बेबस कर दिया हैं।

3 worlds (lok) - Brahma Kumaris
Paramdham - 3 worlds - Brahma Kumaris

यह चित्र 3 दुनिया दिखा रहा है (साकर दुुनिया, सूक्ष्म लोक और परमधाम)

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