आज की मुरली 12 March 2019 Murli today in Hindi

BrahmaKumaris murli today Hindi Aaj ki gyan murli Madhuban 12-03-2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति “बापदादा” मधुबन

“मीठे बच्चे – अन्तर्मुखी हो याद का अभ्यास करो, चेक करो कि आत्म-अभिमानी और परमात्म-अभिमानी कितना समय रहते हैं”

प्रश्नः-

जो बच्चे एकान्त में जाकर आत्म-अभिमानी बनने की प्रैक्टिस करते हैं उनकी निशानी क्या होगी?

उत्तर:-

उनके मुख से कभी उल्टा-सुल्टा बोल नहीं निकलेगा। 2-भाई-भाई का आपस में बहुत लव होगा। सदा क्षीरखण्ड होकर रहेंगे। 3-धारणा बहुत अच्छी होगी। उनसे कोई विकर्म नहीं होगा। 4-उनकी दृष्टि बहुत मीठी होगी। कभी देह-अभिमान नहीं आयेगा। 5-कोई को भी दु:ख नहीं देंगे।

ओम् शान्ति।

रूहानी बच्चों प्रति, सिर्फ रूह कहेंगे तो फिर जीव निकल जाता है इसलिए रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप समझाते हैं – अपने को आत्मा समझना है। हम आत्माओं को बाप से यह नॉलेज मिलती है। बच्चों को देही-अभिमानी हो रहना है। बाप आये ही हैं बच्चों को ले जाने लिए। भल सतयुग में तुम आत्म-अभिमानी बनते हो परन्तु परमात्म-अभिमानी नहीं। यहाँ तुम आत्म-अभिमानी भी बनते हो तो परमात्म-अभिमानी भी अर्थात् हम बाप की सन्तान हैं। यहाँ और वहाँ में बहुत फ़र्क है। यहाँ है पढ़ाई, वहाँ पढ़ने की बात नहीं। यहाँ हर एक अपने को आत्मा समझता है और बाबा हमको पढ़ाते हैं, इस निश्चय में रहकर सुनेंगे तो धारणा बहुत अच्छी होगी। आत्म-अभिमानी बनते जायेंगे। इस अवस्था में टिकने की मंजिल बहुत बड़ी है। सुनने में बहुत सहज लगता है। बच्चों को यही अनुभव सुनाना है कि हम कैसे अपने को आत्मा और दूसरे को भी आत्मा समझ बात करते हैं। बाप कहते हैं मैं भल इस शरीर में हूँ परन्तु मेरी यह असुल की प्रैक्टिस है। मैं बच्चों को आत्मा ही समझता हूँ। आत्मा को पढ़ाता हूँ। भक्ति मार्ग में भी आत्मा पार्ट बजाती आई है। पार्ट बजाते-बजाते पतित बनी है। अब फिर आत्मा को पवित्र बनना है। सो जब तक बाप को परमात्मा समझकर याद नहीं करेंगे तो पवित्र कैसे बनेंगे। इस पर बच्चों को बहुत अन्तर्मुखी हो याद का अभ्यास करना है। नॉलेज सहज है। बाकी यह निश्चय पक्का रहे कि हम आत्मा पढ़ते हैं, बाबा हमको पढ़ाते हैं, तो धारणा भी होगी और कोई विकर्म नहीं होगा। ऐसे नहीं, इस समय हमसे कोई विकर्म नहीं होता है। विकर्माजीत तो अन्त में बनेंगे। भाई-भाई की दृष्टि बहुत मीठी रहती है। इसमें कभी देह-अभिमान नहीं आयेगा। बच्चे समझते हैं बाप की नॉलेज बड़ी डीप है। अगर ऊंच ते ऊंच बनना है तो यह प्रैक्टिस अच्छी रीति करनी पड़े। इस पर गौर करना पड़े। अन्तर्मुखी होने के लिए एकान्त भी चाहिए। यहाँ जैसा एकान्त घर में धन्धेधोरी में तो मिल न सके। यहाँ तुम यह प्रैक्टिस बहुत अच्छी कर सकते हो। आत्मा को ही देखना पड़े। अपने को भी आत्मा समझना है यह प्रैक्टिस यहाँ करने से आदत पड़ जायेगी। फिर अपना चार्ट भी रखना चाहिए – कहाँ तक आत्म-अभिमानी बने हैं? आत्मा को ही हम सुनाते हैं, उनसे ही बातचीत करते हैं। यह प्रैक्टिस बहुत अच्छी चाहिए। बच्चे समझते होंगे यह बात तो ठीक है। देह-अभिमान निकल जाए और हम आत्म-अभिमानी बन जाएं, धारणा करते और कराते जाएं। कोशिश कर अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना – यह चार्ट बड़ा डीप है। बड़े-बड़े महारथी भी समझते होंगे – बाबा जो दिन-प्रतिदिन सब्जेक्ट देते हैं विचार सागर मंथन करने के लिए, यह तो बहुत बड़ी प्वाइंट्स हैं। फिर कभी भी मुख से कोई उल्टा-सुल्टा अक्षर नहीं निकलेगा। भाइयों-भाइयों का आपस में बहुत लॅव हो जायेगा। हम सब ईश्वर की सन्तान हैं। बाप की महिमा को तो जानते ही हो। कृष्ण की महिमा अलग, उनको कहते हैं सर्वगुण सम्पन्न…. परन्तु कृष्ण के पास गुण कहाँ से आये? भल उनकी महिमा अलग है, परन्तु सर्वगुण सम्पन्न बना तो ज्ञान सागर बाप से ही है ना। तो अपनी जांच बहुत रखनी है, क़दम-क़दम पर पूरा पोतामेल निकालना है। व्यापारी लोग सारे दिन की मुरादी रात को सम्भालते हैं। तुम्हारा भी व्यापार है ना। रात्रि को जांच करनी है कि हमने सबको भाई-भाई समझकर बात की? कोई को भी दु:ख तो नहीं दिया? क्योंकि तुम जानते हो हम सब भाई क्षीर सागर की तरफ जा रहे हैं। यह है विषय सागर। तुम अभी न रावण राज्य में हो, न राम राज्य में हो। तुम बीच में हो तो अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। देखना है कहाँ तक हमारी वह भाई-भाई के दृष्टि की अवस्था रही? हम सब आत्मायें आपस में भाई-भाई हैं, हम इस शरीर से पार्ट बजाते हैं। आत्मा अविनाशी है, शरीर विनाशी है, हमने 84 जन्मों का पार्ट बजाया है। अब बाप आये हैं, कहते हैं मामेकम् याद करो, अपने को आत्मा समझो। आत्मा समझने से भाई-भाई हो जाते हैं। यह बाप ही समझाते हैं। बाप के सिवाए और कोई का पार्ट ही नहीं। प्रेरणा आदि की बात नहीं। जैसे टीचर बैठ समझाते हैं, वैसे बाप बच्चों को समझाते हैं। यह विचार करने की बात है, इसमें समय भी देना पड़ता है। बाप ने धन्धा आदि करने के लिए तो कह दिया है लेकिन याद की यात्रा भी जरूरी है। उसके लिए भी टाइम निकालना चाहिए। सर्विस भी सबकी भिन्न-भिन्न है। कोई बहुत टाइम निकाल सकते हैं। मैगजीन में भी युक्ति से लिखना है कि यहाँ ऐसे बाप को याद करना होता है। एक-दो को भाई-भाई समझना होता है।बाप आकर सभी आत्माओं को पढ़ाते हैं। आत्मा में दैवीगुणों के संस्कार अभी भरने हैं। मनुष्य पूछते हैं भारत का प्राचीन योग क्या है? तुम समझा सकते हो परन्तु तुम अभी बहुत थोड़े हो, तुम्हारा नाम निकला नहीं है। ईश्वर योग सिखलाते हैं। जरूर उनके बच्चे भी होंगे। वह भी जानते होंगे यह किसको भी पता नहीं है। निराकार बाप कैसे आकर पढ़ाते हैं, वह खुद ही समझाते हैं मैं कल्प-कल्प संगमयुग पर आकर खुद बताता हूँ कि मैं ऐसे आता हूँ। किसके तन में आता हूँ, इसमें मूँझने की बात नहीं। यह बना-बनाया ड्रामा है। एक में ही आता हूँ। प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा स्थापना। वह मुरब्बी बच्चा पहले-पहले बनते हैं। आदि सनातन देवी-देवता धर्म स्थापन करते हैं। फिर वही पहले नम्बर में आते हैं। इस चित्र पर समझानी बहुत अच्छी है। ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु सो ब्रह्मा कैसे बनते हैं – यह और कोई समझा न सके। समझाने की युक्ति चाहिए। अभी तुम जानते हो बाबा कैसे देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं, कैसे चक्र फिरता है, इन बातों को और कोई जान न सके। तो बाप कहते हैं ऐसे-ऐसे युक्ति से लिखो। यथार्थ योग कौन सिखला सकते हैं – यह मालूम पड़ जाए तो तुम्हारे पास ढेर आ जायें। इतने बड़े आश्रम जो हैं, सब हिलने लग पडेंगे। यह पिछाड़ी को होना है, फिर वन्डर खायेंगे कि इतनी सब संस्थायें भक्ति मार्ग की हैं, ज्ञान मार्ग की एक भी नहीं, तब ही तुम्हारी विजय होगी। यह भी तुम जानते हो हर 5 हज़ार वर्ष के बाद बाप आते हैं। बाप द्वारा तुम सीख रहे हो, औरों को सिखलाते हो। कैसे किसको लिखत में समझाना है – यह सब कल्प-कल्प युक्तियां निकलती हैं, जो बहुतों को पता पड़ जाता है। सिवाए बाप के एक धर्म की स्थापना कोई कर नहीं सकता। तुम जानते हो – उस तरफ है रावण, इस तरफ है राम। रावण पर तुम जीत पाते हो। वह सब हैं रावण सम्प्रदाय। तुम ईश्वरीय सम्प्रदाय बहुत थोड़े हो। भक्ति का कितना शो है। जहाँ-जहाँ पानी है, वहाँ मेला लगता है। कितना खर्चा करते हैं। कितने डूबते मरते हैं। यहाँ तो ऐसी बात नहीं। फिर भी बाप कहते हैं आश्चर्यवत् मेरे को पहचानन्ती, सुनन्ती, सुनावन्ती, पवित्र रहन्ती फिर भी अहो माया तेरे द्वारा हार खावन्ती। कल्प-कल्प ऐसे होता है। हार खावन्ती भी होते हैं। माया के साथ युद्ध है। माया का भी प्रभाव है। भक्ति को तो हिलना ही है। आधा कल्प तुम प्रालब्ध भोगते हो फिर रावण राज्य से भक्ति शुरू होती है। उनकी निशानियां भी कायम हैं, विकार में जाते हैं फिर देवता तो रहे नहीं। कैसे विकारी बनते हैं, यह दुनिया में कोई जानते नहीं। शास्त्रों में लिख दिया हैं वाम मार्ग में गये। कब गये – यह नहीं समझते हैं। यह सब बातें अच्छी रीति समझने और समझाने की हैं। यह भी तब समझें जब निश्चयबुद्धि हों। उनकी कशिश होगी, कहेंगे ऐसे बाप से हमको मिलाओ। परन्तु पहले देखो घर जाने के बाद वह नशा रहता है? निश्चय बुद्धि रहते हैं? भल याद सतावे, चिट्ठी लिखते रहें, आप हमारे सच्चे बाबा हो, आप से ऊंचा वर्सा मिलता है, आप से मिलने बिगर हम रह नहीं सकते। सगाई के बाद मिलना होता है। सगाई के बाद तड़फते हैं। तुम जानते हो हमारा बेहद का बाप टीचर साजन आदि सब कुछ है। और सबसे दु:ख मिला, उनकी एवज में बाप सुख देते हैं। वहाँ भी सब सुख देते हैं। इस समय तुम सुख के सम्बन्ध में बंध रहे हो।यह पुरूषोत्तम बनने का पुरूषोत्तम युग है। मूल बात है – अपने को आत्मा समझना है, बाप को प्यार से याद करना है। याद से खुशी का पारा चढ़ेगा। हमने सबसे जास्ती भक्ति की है। धक्के बहुत खाये। अब बाप आया है वापिस ले जाने तो जरूर पवित्र बनना है। दैवीगुण धारण करने हैं। पोतामेल रखना है – सारे दिन में कितने को बाप का परिचय दिया? बाप का परिचय देने बिगर सुख नहीं आता, तड़फन लग जाती है। यज्ञ में बहुत विघ्न भी पड़ते हैं, मारें खाते हैं। और कोई सतसंग नहीं जहाँ पवित्रता की बात हो। यहाँ तुम पवित्र बनते हो तो असुर लोग विघ्न डालते हैं। पावन बनकर घर जाना है। संस्कार आत्मा ले जाती है। कहते हैं युद्ध के मैदान में मरेंगे तो स्वर्ग में जायेंगे इसलिए खुशी से लड़ाई में जाते हैं। तुम्हारे पास कमान्डर, मेजर, सिपाही आदि कहाँ-कहाँ से आते हैं। स्वर्ग में कैसे जायेंगे? लड़ाई के मैदान में मित्र-सम्बन्धी याद आते हैं। अब बाप समझाते हैं सबको वापिस जाना है। अपने को आत्मा समझो, भाई-भाई समझो। बाप को याद करो। जो जितना पुरूषार्थ करेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे। वो लोग कहते हैं हम भाई-भाई हैं। परन्तु अर्थ नहीं जानते। बाप को ही नहीं जानते।लोग समझते हैं हम निष्काम सेवा करते हैं। हमको फल की इच्छा नहीं। परन्तु फल तो जरूर मिलना है। निष्काम सेवा तो एक बाप ही करते हैं। बच्चे जानते हैं बाप की कितनी ग्लानि की है। देवताओं की भी ग्लानि की है। अब देवतायें किसी की हिंसा तो कर नहीं सकते। यहाँ तो तुम डबल अहिंसक बनते हो। न काम कटारी चलाना, न क्रोध करना। क्रोध भी बड़ा विकार है। कहते हैं बच्चों पर बहुत क्रोध किया। बाप समझाते हैं थप्पड़ आदि कभी नहीं मारना। वह भी भाई है, उनमें भी आत्मा है। आत्मा छोटी-बड़ी नहीं होती है। यह बच्चा नहीं परन्तु तुम्हारा छोटा भाई है। आत्मा समझना है। छोटे भाई को मारना नहीं चाहिए इसलिए कृष्ण के लिए दिखाते हैं ओखरी से बांधा। वास्तव में ऐसी बातें हैं नहीं। यह भिन्न-भिन्न शिक्षायें हैं। बाकी कृष्ण को क्या परवाह पड़ी है माखन की। वह महिमा भी करते हैं उल्टी चोरी की। तुम महिमा करेंगे सुल्टी, तुम कहेंगे वह तो सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण है। परन्तु यह ग्लानि की भी ड्रामा में नूँध है। अभी सब तमोप्रधान बन पड़े हैं। बाप आकर सतोप्रधान बनाते हैं। पढ़ाने वाला है बेहद का बाप। उनकी मत पर चलना पड़े। डिफीकल्ट से डिफीकल्ट यह सबजेक्ट है। पद भी तुम कितना ऊंच पाते हो। अगर सहज हो तो सब इस इम्तहान में लग जायें। इसमें बड़ी मेहनत है। देह-अभिमान आने से विकर्म बन जायेंगे इसलिए छुई-मुई का दृष्टान्त है। बाप को याद करने से तुम खड़े हो जायेंगे। भूलने से कुछ न कुछ भूल हो जायेगी। पद भी कम हो पड़ता है। शिक्षा तो सबको दी है, जिसकी बाद में गीता बनाई है। गरूड़ पुराण में रोचक बातें लिखी हैं, जो मनुष्यों को डर लगे। रावण राज्य में पाप तो होते ही हैं क्योंकि है ही कांटों का जंगल। बाप कहते हैं दृष्टि को भी बदलना है। बहुत समय से हिरे हुए हैं इसलिए शरीर की तरफ प्यार चला जाता है। विनाशी चीज़ से प्यार रखने से फ़ायदा ही क्या? अविनाशी से प्यार रखने में अविनाशी बन जाता है। बच्चों को यही डायरेक्शन है – उठते-बैठते चलते-फिरते बाप को याद करो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) शरीर विनाशी है, उससे प्यार निकाल अविनाशी आत्मा से प्यार रखना है। अविनाशी बाप को याद करना है। आत्मा भाई-भाई है, हम भाई से बात करते हैं – यह अभ्यास करना है।

2) विचार सागर मंथन कर अपनी ऐसी अवस्था बनानी है जो मुख से कभी कोई उल्टा-सुल्टा बोल न निकले। क़दम-क़दम पर अपना पोतामेल चेक करना है।

वरदान:-

ईश्वरीय संग में रह उल्टे संग के वार से बचने वाले सदा के सतसंगी भव

कैसा भी खराब संग हो लेकिन आपका श्रेष्ठ संग उसके आगे कई गुणा शक्तिशाली है। ईश्वरीय संग के आगे वह संग कुछ भी नहीं है। सब कमजोर है। लेकिन जब खुद कमजोर बनते हो तब उल्टे संग का वार होता है। जो सदा एक बाप के संग में रहते हैं अर्थात् सदा के सतसंगी हैं वह और किसी संग के रंग में प्रभावित नहीं हो सकते। व्यर्थ बातें, व्यर्थ संग अर्थात् कुसंग उन्हें आकर्षित कर नहीं सकता।

स्लोगन:-

बुराई को भी अच्छाई में परिवर्तन करने वाले ही प्रसन्नचित्त रह सकते हैं।

आज की मुरली से कविता 9 March 2019 (Today Murli Poem)

Aaj ki Gyan Murli se Ek Kavita – 9 March 2019. आज की मुरली से कविता. This is poem from today’s baba’s murli. To access old murli poems and more, visit the Daily Murli Poems page.

* मुरली कविता दिनांक 9.3.2019 *

बाप और वर्से को याद करते रहो तुम बारम्बार

निरोगी बनेगी आत्मा मिट जाएंगे सभी विकार

आंखों से जो कुछ दिखता वो खत्म हो जाएगा

हम सब बच्चों संग केवल बाबा ही रह जाएगा

आत्म चिन्तन के लिए एकान्तवासी हो जाओ

ज्ञान का चिन्तन करके आनन्दित होते जाओ

याद के समय तुम्हारा मन कहीं भाग ना पाए

सारा समय तुम्हारा बाप की याद में लग जाए

रावण के पिंजड़े से आजादी की खुशी मनाना

सदा बसन्त ऋतु वाली दुनिया में बच्चों जाना

रूहानी नशे में रहकर पुरानी दुनिया को भुलाना

स्वराज्य अधिकारी बनकर विश्व का राज्य पाना

हर सेकेण्ड और श्वाँस को तुम सेवा में लगाओ

सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त कहलाओ

*ॐ शांति *

—- Useful links —-

Online Services (all listed)

Resources – Divine collection

BK Google – A divine search engine for BKs

Brahma Kumaris All useful Websites

Videos Gallery – YouTube playlist

Main Blog – Articles, Q & A

.

ज्ञान मुरली क्या है? – What is Gyan Murli?

शिव बाबा की ज्ञान मुरली का यथार्थ अर्थ और परिचय – सभी भाई बेहेन के लिए। जरूर जरूर पढ़े।

* Definition and importance of Shiv Baba’s Gyan Murli for me * Do SHARE this post to everyone.

AND visit BK articles – Hindi & English to access all Articles.

Brahma Kumaris murli of Shiv baba

✿ मुरली एक तलवार है जो मिथ्या स्वरूप् माया को काटने में मुझे मदद करती है।

मुरली एक दवा है जो आत्मा में रहे विकारों की बीमारी को मिटा देती है।

❀ मुरली एक आइना है जो मेरे सत्य स्वरूप् को दिखाने में सहायता करती है।

मुरली एक कहानी है जो सारे कल्प में मेरे 84 जन्मों की कहानी बताती है।

✿ मुरली एक कवच है जो बुराइयों से मेरी रक्षा करती है।

मुरली एक जादू है जो मुझे श्याम से सुंदर बनाती है।

❀ मुरली अमृत है जो मेरे हृदय और मन को मधुरता से भर देती है।

मुरली भोजन है जो मेरा पोषण कर मुझे मजबूत बनाने में मदद करती है।

✿ मुरली एक खेल है जो मुझे सदा लाइट रहने में मदद करती है।

मुरली एक फव्वारे के समान है जो मुझपर बरस कर मुझे साफ करती व शीतल बनाती है।

❀ मुरली एक संजीवनी बूटी है जो मुझे जीवनदान देती है और मेरे साँस को सुखेला करती है।

मुरली एक अलंकार है जो मेरे दैवी स्वरुप का श्रृंगार करती है।

✿ मुरली एक परीक्षा का पेपर है जो मुझे स्पष्ट बताती है कि मुझे कहाँ तक चलना है।

मुरली एक सागर है जिसमे डूबकर मैं रिफ्रेश हो जाती हूँ।

❀ मुरली एक सच्चा साथी है जो मुझे नयी दुनिया का राह दिखाता है और देहभान को मार देता है।

मुरली एक खज़ाना है जो मुझे पदमापदम् कमाई के योग्य बनाती है।

✿ मुरली एक नाटक के समान है जो मुझे एक हीरो एक्टर के रूप में प्रत्यक्ष करती है।

मुरली एक नक़्शे के समान है जो आत्मा में छिपे सारे राज़ और ख़ज़ाने खोल देती है।

❀ मुरली एक दुकान के समान हैं जहां से मैं बिना खर्च के जितना लेना चाहूँ ले सकता हूँ।

मुरली एक प्रशिक्षण की किताब के समान है जिसमे समझाया गया है की फ़रिश्ता कैसे बनें ❔

✿ मुरली एक पहेली है जिसमे सम्पूर्ण जीवन जीने की कला के इशारे बताएं गए हैं।

मुरली उस मुरलीधर शिवबाबा के मधुर महावाक्यों के वो स्वर हैं जिन्हें सुनकर मै आत्मा दीवानी हो जाती हूँ।

शिवबाबा याद है ❔

ॐ शान्ति

~~~~ Useful links ~~~~

What is Murli in Brahma Kumaris? (English)

Aaj ki Murli se Kavita – Daily

BrahmaKumari Ka Parichay (Hindi)

7 days RajYog course (Hindi)

RESOURCES section – Everything you need

Android Mobile Apps

.

आज की मुरली से कविता 7 March 2019 (Today Murli Poem)

Aaj ki Gyan Murli se Ek Kavita – 6 March 2019. आज की मुरली से कविता. This is poem from today’s baba’s murli. To access old murli poems and more, visit the Daily Murli Poems page.

* मुरली कविता दिनांक 7.3.2019 *

सतोप्रधान बनने के लिए बाप से योग लगाओ

योग करने के लिए एकान्तवास को अपनाओ

जो कुछ भी है पास तुम्हारे उसको तुम भुलाओ

अपने तन मन धन को ईश्वरीय सेवा में लगाओ

अपनी याद को तुम बाप की याद से मिलाओ

बाप से करण्ट पाकर अपनी आयु को बढ़ाओ

भोर में बाप को याद करके सर्च लाइट पाओ

सबको याद का बल देकर मददगार बन जाओ

अपना सबकुछ बाप पर कर देना तुम कुर्बान

योगबल से मिटाओ देहभान का नाम निशान

तेरे मेरे की हलचल को मन बुद्धि से मिटाओ

रहम का भाव जगाकर मर्सीफुल बन जाओ

व्यर्थ संकल्प की हथौड़ी उपयोग में ना लाओ

हाई जम्प से विघ्नों का पहाड़ पार कर जाओ

*ॐ शांति *

—- Useful links —-

Online Services (all listed)

Resources – Divine collection

BK Google – A divine search engine for BKs

Brahma Kumaris All useful Websites

Videos Gallery – YouTube playlist

Main Blog – Articles, Q & A

.

आज की मुरली से कविता 6 March 2019 (Today Murli Poem)

Aaj ki Gyan Murli se Ek Kavita – 6 March 2019. आज की मुरली से कविता. This is poem from today’s baba’s murli. To access old murli poems and more, visit the Daily Murli Poems page.

* मुरली कविता दिनांक 6.3.2019 *

थालियाँ भरकर ज्ञान रत्न देने आए ज्ञान सागर

फिकरातों से मुक्त होकर भर लो मन की गागर

स्वच्छ होने के लिए भक्त गंगा में डुबकी लगाते

आत्मा रूपी वस्त्र केवल बाप ही स्वच्छ बनाते

ज्ञानमार्ग में चलकर आत्मा पावन बनती जाती

पवित्रता के पंखों से उड़कर अपने घर में जाती

पावन बनने की कोई भी विधि काम ना आएगी

याद की यात्रा ही तुम बच्चों को पावन बनाएगी

कल्प के एक चक्र में वर्ष लग जाते पांच हजार

आधा कल्प गुजरने के बाद आते पांच विकार

अपना और सर्व का तुम कल्याण करते जाओ

खत्म ना हो अपनी कमाई ख़बरदार हो जाओ

बाप समान फिक्र से मुक्त सदा निश्चिन्त रहना

बाप से स्कॉलरशिप लेने का पूरा प्रयास करना

ब्राह्मण जीवन को विशेषता से सम्पन्न बनाओ

विशेष आत्मा का स्वरूप अन्तर्मन में जगाओ

पवित्रता और शांति का प्रकाश फैलाते जाओ

अंधियारा मिटाने वाले लाइट हाउस कहलाओ

*ॐ शांति*

—- Useful links —-

Online Services (all listed)

Resources – Divine collection

BK Google – A divine search engine for BKs

Brahma Kumaris All useful Websites

Videos Gallery – YouTube playlist

Main Blog – Articles, Q & A

.

GOD of Gita – Shivratri Special

The Greatest of all truth – Incorporeal Shiva (Shiv) is the Gita God. Gita is categorized as the greatest scripture in the world since the word “God Says” is mentioned in it meaning Godly version which is the specialty of this spiritual text. Gita includes the essence of knowledge of all Vedas and Shastras. Therefore it has been given the status of Jewel of all shastras or scriptures.

Now the biggest question arises “Who is really the God of Gita ?” Incorporeal (Formless) God who is beyond birth and death or Corporeal deity who come under the birth death cycle?

Due to replacement of the name of formless God – the creator with the corporeal creation Gita significance is rebutted or else Gita would have been worship worthy in the world because incorporeal God Father is accepted and worshipped in all countries and in every religion.

Before we begin,

If you wish to read this article in Hindi, visit the Hindi version

If you wish to listen or download the Audio of this article, visit Audio Version

If you wish to download or print PDF copy of this article, visit PDF version

OR Go to Useful links

REVELATION OF THE GITA GOD SHIVA

Finally, the Universal Light, The God Father has come at the end of the present ignorance dark night of Kaliyuga – the iron aged era for putting an end to this sorrowful, vicious, corrupted and violent world and creating a new Golden aged era referred as Ramrajya, Satyuga, Paradise, Heaven or Swarg, Jannat, Bahist etc in scriptures & religious text so that the earth regains its original strength and purity and become a beautiful place to live in. Since God is one he creates ONE RELIGION and ONE WORLD FAMILY.

He is the same Incorporeal God whose verses are expressed in holy scripture Shrimad Bhagvad Gita that I reincarnate in Bharat (India) through an ordinary chariot (body) of a human being when the irreligiousness and unrighteousness is at it’s peak in the world and create a new religo-politicial righteous world order based on one religion by teaching an ancient science of Rajyoga and Godly (Spiritual knowledge) in order to begin a new cycle. In present scenario all sorts of chaos, sorrows, corruption and sinful actions can be witnessed and experienced which prove that the world is at its peak as described.

To make this godly task of world transformation into a reality, firstly we the souls – the imperishable actors and the children of the supreme soul 1) must recognize our God Father- the creator of paradise/swarg / heaven/ jannant and known as Shiva/ Allah/Khuda/Jehovah/Omkar/infinite names in various religions/spiritual cults who himself reveals his true identity at the end of the world cycle 2) follow his shrimat ( dictates ) for cleansing or purifying our souls and discarding off our devilish traits encompassing vices & destructive instinct that has turned us down from the deity status and this beautiful planet from heaven into hell. He is the ONE CREATOR God and rest all are his creation including us (souls). But we have a spiritual eternal relation of father and children.

Now God father says: Recognize yourself as a soul – the conscious point of light and remember me your supreme soul father who is also the conscious point light form like you, shed off your bodily identifications and relationsin order to destroy your sins and have your God fatherly birthright of heavenly Kingdom before making your way back to your real abode (soul world) with me.

At present we are now at the peak moment of this world transformation and little final moment left for self-transformation and claiming the birthright of purity, peace and happiness in the coming heavenly world from the God father. Chance once missed will be a great miss forever…. Now or never. Awake Awake … before it is too late… and thereafter DO NOT COMPLAIN that GOD –THE BESTOWER OF FORTUNE HAD COME TO MAKE DESTINY AND WE WERE NOT AT ALL AWARE OF THE MESSAGE .

With hearty offering to God father

On God Fatherly service

In this video, there is a brief explanation about the period of incarnation of Gita God, Medium, Purpose, Contribution of us souls in the world transformation, Godly message and attention on acquiring birthright in the new heavenly world arriving in near future.

* Video Version *

GOD of GITA is Shiv – Revelation on Shivratri

~~~~ Useful links ~~~~

PDF version to this article

Revelation of Gita God (Hindi article)

About God – The Supreme Soul

Revelations from Gyan Murli

Shrimat Geeta chapters

About Brahma Kumaris (introduction)

Explore the Sitemap

.

गीता भगवान की प्रत्यक्षता (GOD OF Gita)

सब सत्यों में सत्य महान निराकार शिव है गीता का भगवान । गीता को विश्व में महानतम ग्रंथों की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि इसमें ही भगवान उवाच शब्द आया है अर्थात ईश्वर के महावाक्य जो इसी ग्रन्थ की विशेषता है । गीता में सभी वेद शास्त्रों के ज्ञान का सार है । इसलिए इसे सर्वशास्त्रमई शिरोमणि का दर्जा भी प्राप्त है । अब सब से बड़ा प्रश्न उठता है वास्तविक गीता का भगवान कौन ? निराकार जो जन्म मरण से न्यारा है या देहधारी देवता जो जन्म मरण के चक्र में आता है ।

गीता में निराकार भगवान के बदले साकार देहधारी मर्यादा पुरुषोत्तम देवता याने रचयिता के बदले रचना का नाम डालने से गीता खंडित हो गयी नहीं तो गीता सारे विश्व में पूज्यनीय होती क्योंकि निराकार परमपिता परमात्मा को तो सभी देशों में और सभी धर्म वाले मानते हैं ।

Before we begin,

If you wish to download or print this article, visit the PDF version

If you wish to listen the Audio record of this article, click here

OR Go to Useful links

Geeta GOD Shiv

गीता के भगवान शिव की प्रत्यक्षता

आखिर इस कलियुगी लोह युग की अज्ञानांधकार रूपी रात्रि में दुःखमय विकारी भ्रष्टाचारी हिंसक दुनिया का अंत कर नये स्वर्णिम युग जिसका वर्णन रामराज्य स्वर्ग हेवन बहिश्तइत्यादि नामों से शास्त्रों व अनेक धार्मिक ग्रंथो में उपलब्ध है स्थापन करने हेतु सारे जहॉंन का नूर ज्ञानसूर्य इस धरा पर आ चुके हैं जिससे यह धरा पुनः सशक्त पावन बन निवास लायक सुंदर स्थान बन जाए । चूंकि परमात्मा एक है इसलिए वे एकधर्म व एक वैश्विक परिवार की स्थापना करते हैं ।

यह वही निराकार भगवान है जिनके महावाक्य भारत के पवित्र सनातन ग्रंथ गीता में वर्णित है“ यदा यदाहि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत……तदात्मानं सृजाम्यहम……संभवामि युगे युगे। अर्थात भारत में अति धर्म ग्लानि के समय जब अनैतिकता अत्याचार भ्रष्टाचार पापाचार अपनी चरम सीमा पर होते हैं तभी मैं एक साधारण मनुष्य तन का आधार लेकर एक सतधर्म वाला श्रेष्ठाचारी दुनिया की स्थापना ईश्वरीय ज्ञान व सहज राजयोग की शिक्षा द्वारा करता हूँ जिससे एक नये युग की शुरूआत होती है । वर्तमान समय हम हर तरह के दुःख, भ्रष्टाचार, पाप कर्म, हिंसक प्रवृत्तियों के साक्षी एवं अनुभवी हैं इससे सिद्ध है कि दुनिया आज अंतिम चरण में पहुँच चुका है जैसे कि वर्णित है।

परमात्मा द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य को साकार में लाने के लिए हम पार्टधारी परमात्मा की संतान आत्माओं को सबसे पहले अपने पिता परमात्मा को पहचानना होगा जो स्वर्ग हेवन बहिश्त जन्नत का रचयिता है व जिन्हें शिव, अल्लाह, खुदा, जेवोहा, ओंकार, वाहेगुरू इत्यादि अनंत नामों से विभिन्न धर्मों तथा पंथों में जानते तो हैं परंतु सच्चा परिचय तो वे स्वंय ही कल्प के अंत में आकर देते हैं । दूसरा उनके श्रीमत अथवा मार्गदर्शन अनुसार अपनी आत्मा को पवित्र बनाकर आसुरी अवगुणों याने हिंसक विकारी स्वभाव को परिवर्तन करना होगा जिसके कारण हम देवता पद से नीचे गिरे और यह सुंदर धरा स्वर्ग से नरक में तबदील हो गया । परमात्मा हमारा रचयिता है बाकी सभी उसकी रचनायें हैं परंतु हम आत्माओं का पिता और बच्चे का अनादि संबंध है।

अभी परमात्मा पिता कहते हैं “ देह सहित देह के सभी संबंधो का भूल अपने को चेतन ज्यार्तिबिन्दु आत्मा समझ मुझ निराकार ज्यार्तिबिन्दु परमात्मा को याद करो तो तुम्हारे पाप कर्म नष्ट हो जायेंगे व तुम अपना स्वर्गीय राज्य भाग्य का ईश्वरीय जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त कर मेरे साथ अपने वास्तविक घर परमधाम वा मुक्तिधाम चलेंगे।

वर्तमान समय हम विश्व परिवर्तन की चरम सीमा पर खड़े हैं और कुछ ही समय शेष बचे हैं जिसमें हमें स्वपरिवर्तन कर भविष्य में आने वाली नई स्वर्गीय दुनिया में पवित्रता, सुख, शांतिका अपना जन्मसिद्ध अधिकार परमात्म पिता से प्राप्त कर सकते हैं । ध्यान रहे एक बार मौका खोना माना सदा के लिए खो देना । अभी नहीं तो कभी नहीं । जागो जागो अधिक देरी होने से पहले फिर यह उल्हना न देना कि भाग्य विधाता भगवान भाग्य बॉटने आये और हमें संदेश का पता ही नही चला ।

परमात्म पिता को हार्दिक अर्पण

ईश्वरीय सेवा में…

BK Anil

इस विडियो में संक्षिप्त रूप में गीता के भगवान के दिव्य अवतरण का समय, उनका साकार माध्यम, उद्देश्य, विश्व परिवर्तन में हम आत्माओं का सहयोग, परमात्मा सन्देश, तथा भविष्य में आने वाली नयी स्वर्गीय दुनिया में अपना जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त करने हेतु अटेंशन खीचंवाया गया है ।

* Video Version *

GOD of Geeta (Hindi audio + visual)

~~~ Useful links ~~~

PDF version of this article

7 days online course in Hindi

Ishwariya Nimantran (Hindi)

About God – Shiv Baba (introduction)

Maha Shivrati – Main page

RESOURCES – Everything

Other Articles

BK Google – Search Engine for BKs

.

4 March 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

Hindi Poem from today’s murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 4 March 2019. This poem is daily written on day’s murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page.

* मुरली कविता दिनांक 4.3.2019 *

हम जैसा भग्यशाली कोई और नजर ना आता

खुद ज्ञान सागर बाप टीचर बनकर हमें पढ़ाता

ईश्वरीय सेवा करने का जितना शौक बढ़ाओगे

देह का भान मिटेगा और मोहमुक्त बन जाओगे

बाप नहीं है देहधारी वो सदा विदेही कहलाता

खुद को विदेही समझना दिल को बड़ा सुहाता

क्या से क्या हम बनने वाले यही स्मृति जगाओ

देवी देवताओं का पवित्र गृहस्थ धर्म अपनाओ

अपने भारत को बच्चों तुम सतोप्रधान बनाना

ज्ञान सुनाकर सबको तुम घोर निद्रा से जगाना

पवित्रता के गुण को अच्छी तरह धारण करना

कोई छी छी काम बच्चों कभी नहीं तुम करना

मोह की सब रगें तोड़कर सेवा करके दिखाओ

सूर्यवंशी राजाई की प्राइज बाबा से तुम पाओ

ज्ञान सागर विदेही बाप से रोज पढ़ाई पढ़ना

बाप समान विदेही बनने का पुरुषार्थ करना

श्रेष्ठ वृत्ति का व्रत लेकर तुम शिवरात्रि मनाओ

अपनी कमजोर वृत्तियाँ सदा के लिए मिटाओ

शुभ वृत्ति द्वारा श्रेष्ठ बोल और श्रेष्ठ कर्म करना

विश्व परिवर्तन का कार्य सहज सम्पन्न करना

दिल में खुशी का सूर्य जो रखते सदा उगाकर

वही रखते जीवन को खुशनुमा सदा बनाकर

*ॐ शांति*

—- Useful links —-

Online Services (all listed)

Resources – Divine collection

BK Google – A divine search engine for BKs

Brahma Kumaris All useful Websites

Videos Gallery – YouTube playlist

Main Blog – Articles, Q & A

.

Complaint Againt Centre Construction in India

Brahma Kumaris making centre construction which disturbs the surrounding. Our Response to this asked question via Email.

Original email

Dear ma’am,
We are facing a lot of issues with the construction work going on in Chandigarh for your new center in sector 43. Pls see below. Kindly see NO corrective action has been taken despite visit and promises by your Chandigarh team (Ms. Kavita):
1. The labour is still burning wood. The photos show so much smoke. We are perpetually coughing morning and evening because of this fire and smoke. Our senior citizens and children will get sick thanks to your apathy!!
2. See the wall- the full 33 foot common wall has been built above the limit of 6 feet. Kindly get the illegal portion (right side) of wall/store demolished as discussed.
This total apathy and lack of understanding towards your future neighbors and co-residents was not at all expected from a responsible organization like yours.

K

Our Response

From: Prajapita Brahma Kumari Ishwariya Vishwa Vidhyalay

To: Kavit Sharma ji

Your letter is received and read. We apologize you for every inconvenience caused, which was unexpected.

It is nice to see that there are still many wise and thoughtful people like you in Bharat (present India) who cares and still does not make a decision with a little experience. The meaning is – It is good that you have reported this. And it is even better that you understand that Prajapita Brahma Kumaris is a very reputed spiritual organisation cum Godly university, where we serve the knowledge of Raja Yog (soul, supreme soul, world drama, law of karma..) for a divine purpose, which has caused life transformation in many, who then started spreading the message of God.

In doing so, we need to build a small centre, or atleast a 2 rooms house, where neighbors can gather and take the free 7 days course. That’s all i expected. BUT we also realise that some sisters and brothers who ”seem” to disturb the services on the name of Brahma Kumaris. Please forgive them. This happens because everyone is free to build a centre in the name of Prajapita Brahma Kumari if they wish to do service intheir area. We can only advice them.

We also wish to let you and your family know that – God has come. You can take the 7 days free course either online or at a centre, where you will be explained the entire knowledge of murli.

Who am i ?

The question which is most important, to the search of God and our eternal relationship with him. Second – about World Drama of 5000 years and how it is played and when does God has to come into this corporeal world… many points.

However you think, but surely you would wish to know – How an organisation (BKWSU) is functioning in around 140 countries and it has 9000 centres.!

This happened in just 43 years without any internal conflict. RajYog is the way of self realisation and a direct connection with God, our father (of all souls). Shiv baba’s direct words spoken through mouth medium of Brahma (prajapita – first human being) is called Murli.

Kavit, you are understanding and have been given a good mind to think and decide. ask yourself – is this present world with 7 Billion human beings and intolerance among each other. How long will such world go? What will happen? Who decides?

Do follow or save the given links to find the answers. Read only when you are free. It requires peace around you.

—- Useful Links —-

7 days RajYog course online: https://www.brahma-kumaris.com/rajyoga-course
What is Murli?: https://www.brahma-kumaris.com/what-is-murli
Revelations by God: https://www.brahma-kumaris.com/revelations
We wait for your response.

Accha
Namaste
In God Fatherly World Service
00

3 March 2019 Shivratri Special Poem

Hindi Poem from today’s murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 3 March 2019 (Maha Shivratri). This poem is daily written on day’s murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page.

Today’s special ->

Shivratri Sandesh (Hindi)

and

hivratri message (English)

* दिव्यता अपनाओ भारत को स्वर्ग बनाओ *

जाने किस नींद में सोया रह गया आत्मा राजा

लूट लिया रावण ने उसे खोले बिना दरवाजा

किस चोर दरवाजे से रावण अन्दर घुस आया

बिना खबर के हमारा सब कुछ उसने चुराया

दिव्यता के सुन्दर महल को खण्डहर बनाया

दीवारों दरवाजों पर विकारों का छिद्र बनाया

जन्म हो गया पापों का जहर बन चुका पानी

भ्रष्ट हुई जनता सारी भ्रष्ट हो चुके राजा रानी

राज कुंवर जैसा सुन्दर मन पूरा बेलगाम हुआ

पवित्रता को हारा खेलकर देहभान का जुआ

घर घर में बहते प्यार के झरने सारे सूख गये

बंजर हुई धरती बरसने वाले बादल रूठ गये

धन के हुए गुलाम गिरी नैतिकता दलदल में

विश्वास करने लगे सारे केवल धन के बल में

पतन की और बढ़ते सब रुक ना कोई पाता

नरक हो गया जीवन समझ नहीं क्यों आता

पहचानों हे इंसानों तुम अपनी सत्य पहचान

समझाने आया तुम्हें शिव परमात्मा भगवान

सुना रहा हम सबको वो सत्य गीता का ज्ञान

अपनाकर ये ज्ञान तुम बन जाओ देव समान

छोड़ो विकारी जीवन दिव्यता को अपनाओ

देवभूमि इस भारत को फिर से स्वर्ग बनाओ

* ॐ शांति *

—- Useful links —-

NEWS – New uploads (pdf, videos)

Online Services (all listed)

Resources – Divine collection

BK Google – A divine search engine for BKs

Brahma Kumaris Website links

Videos Gallery – YouTube playlist

Follow our Main Blog

.

Design a site like this with WordPress.com
Get started